नई दिल्ली, 18 मार्च (हि.स.)। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम स्थित साध नगर के राम चौक बाजार में बुधवार सुबह लगा भीषण अग्निकांड दिल दहला देने वाला साबित हुआ। चार मंजिला इमारत में लगी आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया और एक ही परिवार के कई सदस्यों को अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य झुलसकर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। पालम के साध नगर में हुए अग्निकांड के मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, इस संबंध में पालम गांव थाने में बीएनएस की धारा 287, 125(ए) और 106(1) में मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर अज्ञात जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इमारत के मालिक, निर्माण से जुड़े लोगों और वहां संचालित गतिविधियों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही दमकल विभाग की रिपोर्ट और मौके से जुटाए गए साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब 6:40 बजे अचानक बिल्डिंग से धुआं उठता दिखा। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को घेर लिया। काले धुएं के घने गुबार के बीच ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग बालकनी में खड़े होकर मदद की गुहार लगाते नजर आए। चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल था, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
प्रारंभिक जांच में आग की वजह सोलर पैनल कनेक्शन में शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि बेसमेंट, ग्राउंड और पहली मंजिल पर कपड़े और कॉस्मेटिक के शोरूम थे, जहां नेल पॉलिश, थिनर, रिमूवर, डियो जैसे ज्वलनशील पदार्थ बड़ी मात्रा में रखे थे। आग लगते ही इन पदार्थों ने आग को और भड़काने का काम किया और कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत आग के गोले में तब्दील हो गई।
एक ही परिवार के 18 सदस्य रहते थे इमारत में
जिस इमारत में आग लगी, वह बाजार के प्रधान राजेंद्र कश्यप की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, वह अपने पांच बेटों और पूरे परिवार के 18 सदस्यों के साथ दूसरी और तीसरी मंजिल पर रहते थे। उनके चार बेटों की शादी हो चुकी थी, जबकि नीचे की मंजिलों पर कपड़े, कॉस्मेटिक और ब्यूटी पार्लर के शोरूम संचालित किए जाते थे। हादसे के समय राजेंद्र कश्यप गोवा में थे। घटना की जानकारी मिलते ही वह दोपहर की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे, लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। इस हादसे में उनकी पत्नी लाडो, बेटी हिमांशी, बेटा प्रवेश, कमल, बहुएं आशु और दीपिका तथा तीन पोतियों की मौत हो गई। परिवार के दो बेटे अनिल और सचिन समेत एक दो वर्षीय बच्ची अस्पताल में भर्ती हैं। एक अन्य बेटा सुनील घटना के समय शिमला में था और वह भी वापस लौट आया है।
सो रहे थे अधिकांश सदस्य, नहीं मिल सका बचने का मौका
पड़ोसियों का कहना है कि घटना के समय परिवार के अधिकांश सदस्य सो रहे थे। निचली मंजिल में लगी आग की जानकारी उन्हें समय रहते नहीं मिल पाई। जब तक लोगों की नींद खुली, तब तक आग सीढ़ियों तक पहुंच चुकी थी और नीचे जाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था।
बताया जा रहा है कि छत पर जाने वाले दरवाजे पर ताला लगा हुआ था और घबराहट में किसी को चाबी नहीं मिल पाई। ऐसे में सभी लोग बालकनी की ओर भागे और वहीं से मदद की गुहार लगाने लगे।
दमकल की देरी और तकनीकी खामी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों में दमकल विभाग को लेकर भी भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि सूचना देने के बावजूद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां 40 से 45 मिनट की देरी से मौके पर पहुंचीं। इतना ही नहीं, मौके पर पहुंची एक गाड़ी का हाइड्रोलिक सिस्टम भी काम नहीं कर रहा था, जिससे बचाव कार्य में और देरी हुई। लोगों का कहना है कि अगर समय पर हाइड्रोलिक सीढ़ी वाली गाड़ी पहुंच जाती और उपकरण सही तरीके से काम करते, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। बाद में दूसरी गाड़ी मंगाई गई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
चीख-पुकार के बीच थम गईं आवाजें
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद दूसरी और तीसरी मंजिल से काफी देर तक लोगों के चिल्लाने की आवाजें आती रहीं। परिवार के सदस्य नीचे खड़े पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन आग की भयावहता के कारण कोई भी अंदर नहीं जा सका।
करीब एक घंटे बाद बिल्डिंग से आने वाली आवाजें अचानक बंद हो गईं। दमकल कर्मियों ने बाद में अंदर जाकर कई लोगों को अचेत अवस्था में बाहर निकाला।
बेटी को बचाने के लिए पिता ने उठाया बड़ा कदम
हादसे के दौरान एक मार्मिक दृश्य भी सामने आया। आग में फंसे अनिल ने अपनी दो वर्षीय बेटी को बचाने के लिए उसे नीचे खड़े लोगों की ओर फेंक दिया। बच्ची गिरने से घायल हो गई, लेकिन उसकी जान बच गई। इसके बाद अनिल ने खुद भी छलांग लगा दी।
वहीं, उनका भाई सचिन पड़ोसी की छत पर कूदकर किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहा, हालांकि वह गंभीर रूप से झुलस गया। एक अन्य सदस्य प्रवेश ने भी छलांग लगाई, लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
बचाव के दौरान बच्ची गिरने का आरोप
कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि बचाव अभियान के दौरान एक बच्ची को हाइड्रोलिक लिफ्ट से नीचे लाया जा रहा था, तभी उस पर पानी की तेज बौछार पड़ने से वह संतुलन खो बैठी और नीचे गिर गई। हालांकि इस घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों में इसे लेकर नाराजगी है।
दीवार तोड़कर बचाने की कोशिश
पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर आग में फंसे लोगों को बचाने के लिए पड़ोस की छत से दीवार तोड़ने का प्रयास भी किया। हथौड़ों और औजारों की मदद से दीवार में छेद किया गया, लेकिन इसमें करीब दो घंटे लग गए। तब तक आग पूरी तरह फैल चुकी थी।
दमकल कर्मियों ने बाद में हाइड्रोलिक मशीन और अन्य उपकरणों की मदद से कई लोगों को बाहर निकाला, लेकिन ज्यादातर लोग बेसुध अवस्था में थे।
धुएं और लपटों में घिरी रही पूरी इमारत
दमकल अधिकारियों के अनुसार, हादसे के दौरान इमारत के अंदर धुआं इतना ज्यादा भर गया था कि अंदर प्रवेश करना बेहद मुश्किल हो गया था। जिन लोगों को बाहर निकाला गया, उनके शरीर पर धुएं की कालिख जमी हुई थी और कई लोग गंभीर रूप से झुलस चुके थे।
घायलों को मणिपाल, इंदिरा गांधी और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
30 से ज्यादा दमकल गाड़ियों ने पाया काबू
आग की भयावहता को देखते हुए दमकल विभाग को करीब 30 गाड़ियां मौके पर भेजनी पड़ीं। कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। दमकल अधिकारियों का कहना है कि इमारत में भारी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग तेजी से फैली, जिससे बचाव कार्य में काफी दिक्कतें आईं।
मामला दर्ज, जांच जारी
साउथ-वेस्ट जिले के डीसीपी के अनुसार, इस मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब आग लगने के सही कारणों, बिल्डिंग की संरचना और सुरक्षा मानकों की जांच कर रही है।
लापरवाही ने छीनीं जिंदगियां
यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब तक अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी लोगों की जान लेती रहेगी। बंद इमारत, ज्वलनशील सामान और बचाव के पर्याप्त इंतजाम न होना इस त्रासदी की बड़ी वजह बनकर सामने आया है।
फिलहाल, इलाके में मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी
