– स्वास्थ्य की रक्षा और स्वच्छता का संदेश देता है शीतलाष्टमी पर्व

वाराणसी,11 मार्च (हि. स.)। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और सभ्यता की पहचान है। सदियों से गंगा हमें जीवन, समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति देती आई है। इस संदेश के साथ गंगा किनारे मणिकर्णिका तीर्थ पर फैली गंदगी को नमामि गंगे के स्वयंसेवकों ने बुधवार को श्रमदान कर हटाया ।
स्वास्थ्य की रक्षा स्वच्छता से ही संभव है का आह्वान करते हुए शीतलाष्टमी पर्व पर काशी के महातीर्थ पर स्वच्छता अभियान के तहत गंगा किनारे जगह-जगह पड़े कूड़े-कचरे को समेटकर नगर निगम कर्मचारियों तक पहुंचाया गया । घाट पर श्रमदान के बाद वहां मौजूद आम लोगों को गंगा और घाटों को स्वच्छ रखने की अपील की गई ।
इस दौरान नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि गंगाजल करोड़ों को रोजी-रोटी देता है । हमारी पेय जल, सिंचाई, धार्मिक, पर्यटन, तीर्थाटन व अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। गंगाजल हमारे जीवन से लेकर मृत्यु तक के समग्र ताने-बाने का केंद्र है। गंगा तट पर गंदगी न हो इसके लिए हमें सामूहिक रूप से भागीदारी निभानी होगी।
आइए मिलकर यह प्रण लें कि गंगा किनारे गंदगी नहीं करेंगे, दूसरों को भी जागरूक करेंगे और इस पवित्र धारा का सम्मान करेंगे। गंगा की रक्षा करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, आज के लिए भी और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी। शीतलाष्टमी का पर्व भी हमें प्रकृति को सहजने और स्वच्छता का ही संदेश देता है । श्रमदान में नगर निगम के कर्मी भी शामिल रहे।——————
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी
