
नई दिल्ली, 10 मार्च (हि.स.)। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि विकसित दिल्ली बनाने के लिए सरकार और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग की जरुरत है।

उन्होंने मंगलवार नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई दिल्ली स्टेट एनुअल सेशन 2025–26 एवं बिजनेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेते हुए यह बात कही। यह सम्मेलन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) द्वारा आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग प्रतिनिधि, नीति निर्माता और विशेषज्ञ शामिल हुए।
उन्होंने ‘दिल्ली 2047: कैपिटल ऑफ ग्रोथ, इनोवेशन एंड ग्लोबल पार्टनरशिप्स’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली के व्यापार जगत ने व्यापार वृद्धि, रोजगार सृजन और शहर की अर्थव्यवस्था में उद्योगों के योगदान से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं। इनमें बुनियादी ढांचे, नीतिगत ढांचे और भूमि की उपलब्धता से जुड़े विषय भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार उद्योग जगत के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से भविष्य के लिए नीतियां बनाने और बेहतर व्यावसायिक वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि डीरिगुलेशन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से दिल्ली में व्यापार और उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जा रहा है। दिल्ली सरकार व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योगों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए लगातार उद्योग संगठनों और हितधारकों से बातचीत कर रही है, इसके सार्थक परिणाम भी आ रहे है।
सूद ने कहा कि सरकार शिक्षा को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर काम कर रही है। इसके तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के पाठ्यक्रम को आधुनिक और तकनीक युक्त बनाया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुसार कौशल की ट्रेनिंग मिल सके। उन्होंने दिल्ली के युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। दिल्ली सरकार द्वारा हाल ही में आयोजित एक नए कार्यक्रम स्टार्टअप युवा फेस्टिवल के माध्यम से कई नवाचारपूर्ण स्टार्टअप विचारों को आर्थिक सहायता भी दी गई। साथ ही सरकार एक नई इन्क्यूबेशन नीति पर काम कर रही है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में लगभग 325 करोड़ रुपये का निवेश कर 2035 तक करीब 5,000 स्टार्टअप्स को समर्थन देने की योजना है।
सूद ने कहा कि सरकार असंगठित सेवा क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर विचार कर रही है, जो आने वाली नीतिगत पहलों का हिस्सा हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बेहतर बनाने के लिए कई सुधार किए जा रहे हैं। इसके तहत फायर एनओसी प्रक्रिया का सरलीकरण, श्रम नियमों और आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े कुछ लाइसेंसिंग प्रावधानों को जनहितकारी बनाया जा रहा है, ताकि दिल्ली में स्थापित और नए उद्योगों के लिए काम करना और आसान हो सके। सूद ने कहा कि सरकार, उद्योग और समाज के बीच मजबूत सहयोग ही दिल्ली को विकास, नवाचार और अवसरों का वैश्विक केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव
