रांची, 10 मार्च (हि.स.)। झारखंड विधानसभा में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के वर्ष 2026 के बजट पर चर्चा के दौरान विधायक हेमलाल मुर्मू ने सरकार के पक्ष में अपनी बात रखी। उन्होंने लगभग 7990 करोड़ 30 लाख रुपये के इस बजट को राज्य की जरूरतों के अनुरूप बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

सदन में बोलते हुए हेमलाल मुर्मू ने कहा कि राज्य में कैंसर और हृदय रोग के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने बजट में विशेष प्रावधान किया है। उन्होंने बताया कि कैंसर जांच और इलाज को बेहतर बनाने के लिए पांच मेडिकल कॉलेजों में पेट स्कैन मशीन लगाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही सभी जिला अस्पतालों में मेमोग्राफी मशीन उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की समय पर पहचान हो सके। हृदय रोगों की जांच के लिए मेडिकल कॉलेजों में कैथलैब स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है।
विधायक ने राज्य में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अगले वर्ष एमबीबीएस की 220 सीटें बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। भविष्य में इसे बढ़ाकर 2060 सीटों तक ले जाने की योजना है। इसके अलावा वर्तमान में 225 पोस्ट ग्रेजुएट सीटों को अगले चार वर्षों में बढ़ाकर 750 करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने अबुआ दवाखाना योजना का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में 750 अबुआ दवाखाना खोलने का लक्ष्य है। इससे लोगों को सस्ती और दवाएं उपलब्ध होंगी और दवा कंपनियों की मनमानी पर भी रोक लगेगी।
हेमलाल मुर्मू ने रिम्स से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि रिम्स-2 के निर्माण में कुछ असामाजिक तत्वों के विरोध के कारण काम धीमा पड़ गया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि रिम्स में करीब 252 करोड़ रुपये की राशि अभी शेष है, जिसे समय पर खर्च नहीं किया गया तो वह लैप्स हो सकती है। रिम्स में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेडियोलॉजिस्ट और न्यूक्लियर मेडिसिन विशेषज्ञों की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।
विधायक ने कहा कि बेहतर चिकित्सा शिक्षा के लिए योग्य फैकल्टी का होना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि एक कमेटी बनाकर देश के विभिन्न हिस्सों से विशेषज्ञ फैकल्टी की नियुक्ति की जाए ताकि राज्य में बेहतर डॉक्टर तैयार हो सकें। उन्होंने पाकुड़ और गोड्डा जैसे जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पाकुड़ में केवल 40 प्रतिशत ही तैनाती है। गोड्डा सदर अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट और ईएनटी विशेषज्ञ की तत्काल नियुक्ति की जरूरत है।
इसके अलावा उन्होंने सभी 24 जिलों में वृद्ध लोगों के लिए ओल्ड एज होम स्थापित करने का सुझाव दिया। साथ ही नए भवन बनाने के बजाय अधूरे पड़े अस्पताल भवनों को जल्द पूरा कर चालू करने की बात कही। उन्होंने मिलावटखोरी रोकने के लिए फूड सेफ्टी अधिकारियों की संख्या बढ़ाने और पुरानी एम्बुलेंसों को दुरुस्त करने की भी मांग की।
निजी अस्पतालों की मनमानी पर चिंता जताते हुए हेमलाल मुर्मू ने कहा कि इस पर नियंत्रण के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक ऐसी संस्था नहीं बनेगी, निजी अस्पताल की मनमानी को रोकना मुश्किल होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे
