


बरेली, 02 अप्रैल (हि.स.) । बरेली में विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर गुरुवार को जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान, आईएमए कम्युनिटी सर्विस और इंडियन पीडियाट्रिक एकेडमी के संयुक्त तत्वावधान में निःशुल्क ऑटिज्म स्क्रीनिंग सह मूल्यांकन शिविर और अभिभावक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम आईएमए सभागार में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में अभिभावकों और बच्चों ने भाग लिया।

सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक आयोजित स्क्रीनिंग शिविर में करीब 150 बच्चों की जांच और मूल्यांकन किया गया। इसके बाद दोपहर 02 बजे से शाम 05 बजे तक ऑटिस्टिक बच्चों की देखभाल करने वाले अभिभावकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान के चेयरमैन प्रो. डॉ. अमिताव मिश्रा, आईएमए बरेली के अध्यक्ष डॉ. अतुल श्रीवास्तव, आईएमए कम्युनिटी सर्विस के अध्यक्ष डॉ. प्रमेन्द्र महेश्वरी, डॉ. अंशु अग्रवाल, डॉ. शालिनी महेश्वरी, डॉ. केसी गुप्ता, डॉ. एकांश अग्रवाल, डॉ. अमृत, डॉ. प्रेम कुमार, डॉ. गिरीश अग्रवाल, डॉ. जीएस खंडुजा, डॉ. वीके चावला, डॉ. राका चावला और संस्थान की निदेशिका शाश्वती नंदा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम के पहले सत्र में प्रो. डॉ. अमिताव मिश्रा ने ऑटिस्टिक बच्चों में होने वाली सेंसरी, कम्युनिकेशन और बिहेवियरल समस्याओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों में सेंसरी इश्यूज आम होते हैं और इनका सही आंकलन प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा कराया जाना चाहिए। यदि बच्चा आवाज, स्पर्श या अन्य संवेदनाओं पर अधिक प्रतिक्रिया देता है या कम प्रतिक्रिया देता है तो दोनों स्थितियों में अलग-अलग प्रकार की थेरेपी की जरूरत होती है।
उन्होंने कहा कि ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के अभिभावकों को उनके व्यवहार, भाषा और संवाद की कठिनाइयों को समझना चाहिए। सही समय पर पहचान और नियमित थेरेपी से बच्चों में काफी सुधार संभव है। संस्थान की खेल शिक्षिका फारिया खान ने बच्चों के लिए विशेष फन गेम्स भी आयोजित कराए, जिनमें बच्चों ने उत्साह के साथ भाग लिया।
दूसरे सत्र में अभिभावकों को ऑटिस्टिक बच्चों की देखभाल, सेंसरी इश्यूज, भाषा एवं संवाद संबंधी समस्याओं और भावनात्मक व्यवहार को संभालने के तरीके बताए गए। प्रो. डॉ. अमिताव मिश्रा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों की संख्या बढ़ी है, जो चिंता का विषय है। ऐसे में अभिभावकों को विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार बच्चों को थेरेपी और घरेलू प्रशिक्षण देना चाहिए।
आईएमए बरेली के अध्यक्ष डॉ. अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में ऑटिज्म के निदान और उपचार को लेकर काफी प्रगति हुई है, लेकिन पुनर्वास के क्षेत्र में जीवनधारा संस्थान सराहनीय कार्य कर रहा है। वहीं, आईएमए कम्युनिटी सर्विस के अध्यक्ष डॉ. प्रमेन्द्र महेश्वरी ने कहा कि ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि दुनिया को देखने का एक अलग नजरिया है। उचित प्रशिक्षण और सहयोग से ऐसे बच्चों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
संस्थान की संरक्षिका डॉ. राका चावला ने कहा कि ऑटिज्म कोई कमी नहीं, बल्कि सोचने और समझने का अलग तरीका है। ऐसे बच्चों में गहरी एकाग्रता, सृजनात्मकता और सच्ची भावनाएं जैसी विशेषताएं होती हैं। जरूरत है कि समाज उन्हें स्वीकार करे और आगे बढ़ने का अवसर दे।
हिन्दुस्थान समाचार / देश दीपक गंगवार
