-उत्तराखंड में योग और आयुष को मिलेगा बढ़ावा, गढ़वाल-कुमाऊं में स्थापित होंगे स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन

ऋषिकेश, 13 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में कहा कि उत्तराखंड सरकार योग और आयुष को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई पहल कर रही है। इसी क्रम में गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन स्थापित किए जाएंगे, जिसके लिए बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को योग नगरी ऋषिकेश स्थित परमार्थ में आयोजित 38वें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए योग साधकों, योगाचार्यों और अतिथियों का देवभूमि उत्तराखंड में स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारत की प्राचीन और महान परंपरा है, जिसे आज विश्वभर के करोड़ों लोग अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन का सार्वभौमिक विज्ञान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष वेलनेस सेंटर और नेचुरोपैथी केंद्रों को भी निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में 300 से अधिक आयुष्मान आरोग्य केंद्र संचालित हैं और प्रत्येक जनपद में 50 एवं 10 बेड वाले आयुष चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से विशेषज्ञों की ओर से आयुष परामर्श भी प्रदान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारत की पुण्य भूमि से निकली प्राचीन और महान विधा है, जिसे आज विश्वभर के करोड़ों लोग अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाला सार्वभौमिक विज्ञान है, जो आत्मिक शांति प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि आज जब विश्व तनाव, अवसाद और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहा है, ऐसे समय में योग एक प्राकृतिक उपचार प्रणाली के रूप में लोगों को मानसिक शांति और संतुलन प्रदान कर रहा है। योगासन और प्राणायाम के माध्यम से शरीर और मन को तनावमुक्त किया जा सकता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग ने जाति, भाषा, धर्म और भूगोल की सीमाओं को पार कर मानव समाज को जोड़ने का कार्य किया है और “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के संदेश को विश्वभर में पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में रखा गया था, जिसके बाद आज 180 से अधिक देशों में योग का व्यापक अभ्यास हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि योग और अध्यात्म की भूमि भी है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और शुद्ध वातावरण योग साधना के लिए अत्यंत अनुकूल है। इसी दृष्टि से राज्य सरकार ने उत्तराखंड को योग की वैश्विक राजधानी बनाने के उद्देश्य से “योग नीति 2025” लागू की है।
उन्होंने बताया कि योग एवं ध्यान केंद्रों के विकास के लिए 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी और शोध कार्यों के लिए 10 लाख रुपये तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश में पांच नए योग हब स्थापित किए जा रहे हैं और सभी आयुष हेल्थ एवं वेलनेस सेंटरों में योग सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि ‘उत्तराखंड आयुष नीति’ के माध्यम से औषधि निर्माण, वेलनेस, शिक्षा, शोध और औषधीय पौधों के संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन स्थापित करने के लिए बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महोत्सव में देश-विदेश के प्रतिष्ठित योगाचार्य अपने ज्ञान और अनुभव साझा कर रहे हैं। इसमें हठ योग, राज योग, कर्म योग और भक्ति योग के साथ ध्यान, प्राणायाम और प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती, कैलाश खेर सहित विभिन्न देशों से आए योगाचार्य, योग प्रशिक्षक और पर्यटक उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय
