
कोलकाता, 28 फरवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक घमासान शनिवार को और तेज हो गया। चुनाव आयोग की ओर से अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है, जिसमें करीब 63 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं और 60 लाख मतदाता संदिग्ध की श्रेणी में हैं। इस पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली। हालांकि दोनों पक्षों ने कहा कि अब यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत है और अंतिम निर्णय न्यायपालिका पर निर्भर करेगा।

राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा विवाद अब राजनीतिक दायरे से आगे बढ़ चुका है और न्यायिक विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को देख रहा है और उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। जो भी निर्णय होगा, वह उचित होगा।

राज्यसभा के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी के नामांकन पर भट्टाचार्य ने कहा कि यह कदम सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की तृणमूल कांग्रेस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के सांसद अभिषेक बनर्जी युवाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और मुख्यमंत्री के नेतृत्व को मजबूत कर रहे हैं।
दूसरी ओर, नदिया जिले में भारतीय जनता पार्टी के सांसद जगन्नाथ सरकार ने अपनी पार्टी पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा हिंदुओं के पक्ष में खड़ी रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस पर उन्होंने मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया था, लेकिन आयोग कभी भी भारतीय जनता पार्टी के नियंत्रण में नहीं रहा। अब जब मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष है, तो जो भी हो रहा है, वह न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार हो रहा है।
बालूरघाट में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री और पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने भी विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी मतदाता सूची पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो सूची सामने आई है वह अंतिम सूची नहीं है। कुछ नामों को स्वीकृति मिली है, जबकि शेष नामों की जांच न्यायिक अधिकारी कर रहे हैं। पात्र पाए जाने पर नाम जोड़े जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा विरोध प्रदर्शन राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।
राज्यसभा चुनाव के लिए पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और मेनका गुरुस्वामी के नामांकन पर मजूमदार ने तृणमूल कांग्रेस पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राजीव कुमार को सारदा प्रकरण की जांच के दौरान किए गए कार्यों के लिए पुरस्कृत किया गया है, जबकि एक अन्य अधिवक्ता को मुख्यमंत्री से जुड़े एक मामले में पैरवी करने के कारण राज्यसभा भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को मुकदमा लड़ने के बदले राज्यसभा भेजा जाता है तो यह दर्शाता है कि पार्टी में योग्य लोगों की कमी है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
