जम्मू, 28 जनवरी (हि.स.)। शिवसेना (यूबीटी) जम्मू-कश्मीर इकाई प्रमुख मनीश साहनी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 पर

अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रों के जहन में जात पात व भेदभाव के बीज बोए जा रहे हैं जो भविष्य के लिए गंभीर खतरे की घंटी है।

इससे पढ़ाई नहीं लड़ाई बढ़ने की आशंका है। पार्टी प्रदेश मध्यवर्ती कार्यालय में पत्रकारों से विशेष बातचीत पर प्रदेश प्रमुख मनीश साहनी ने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जातिगत भेदभाव के गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थान सर्वधर्म-जात स्थल है। यह कानून, छात्रों के जीवन से भेदभाव के बीज बो सकता है।
पहले धर्म की अफीम चटाकर हिन्दू-मुस्लिम किया गया और अब जात-पात के आधार पर हिन्दुओं को आपस में बांटा जा रहा है। यूजीसी के नए कानून को अगाडी बनाम पिछड़ा बना दिया गया है। वही जगतगुरु शंकराचार्य के अपमान भी बांटने की साजिश हो रही है। संत व सरकारी अधिकारियों (बाबू) भी दो खेमों में बंट गए हैं। जो देश व आपसी भाईचारा को लेकर गंभीर खतरे की घंटी है।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता
