शिमला, 10 फ़रवरी (हि.स.)। शिमला जिला के रोहड़ू क्षेत्र में वन विभाग ने मंगलवार को एक बड़े अभियान के दौरान वन्यजीव अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त का खुलासा किया है। ज्वैलरी की आधा दर्जन दुकानों की आड़ में वन्य प्राणियों के अंग छिपाकर रखे गए थे। इन्हें कथित रूप से ताबीज और आभूषणों में इस्तेमाल करने के लिए बेचा जा रहा था। इस कार्रवाई में तेंदुए के नाखून और दांत समेत वन्य जीवों के कई संदिग्ध अवशेष बरामद किए गए हैं।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि रोहड़ू बाजार में वन्यजीवों से जुड़े अवैध सामान का कारोबार हो रहा है। आशंका थी कि यदि अलग-अलग समय पर छापे मारे गए तो आरोपियों को सबूत छिपाने का मौका मिल सकता है। इसी कारण विभाग ने एक साथ कई दुकानों पर कार्रवाई की योजना बनाई।

डीएफओ रवि शंकर के नेतृत्व में 12 डिप्टी रेंजर, 22 फॉरेस्ट गार्ड और 12 वन मित्रों की संयुक्त टीम बनाई गई। इसे छह अलग-अलग समूहों में बांटा गया। तय समय पर सभी टीमों ने रोहड़ू बाजार की छह दुकानों पर एक साथ छापेमारी की। अधिकारियों के मुताबिक दुकानों की तलाशी के दौरान दराजों और तिजोरियों से कई संदिग्ध वस्तुएं बरामद हुईं।
जानकारी अनुसार इस पूरी कार्रवाई में तेंदुए के 86 नाखून, पांच दांत और करीब दस दुर्लभ पक्षियों के पंख मिले हैं। इसके अलावा एक ऐसा अवशेष भी मिला है जिसकी प्रजाति की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। बरामद सभी सामान को जांच के लिए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून भेजा जा रहा है, जहां विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि ये अंग किन जानवरों के हैं और इन्हें कब प्राप्त किया गया।
डीएफओ रवि शंकर ने बताया कि प्राथमिक जांच से संकेत मिलते हैं कि यह गतिविधि लंबे समय से चल रही हो सकती है और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि हम केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहेंगे। यह भी पता लगाया जाएगा कि ये अंग जंगलों से यहां तक कैसे पहुंचे और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
वन विभाग के अनुसार इस पूरे प्रकरण में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि एक दुकान मालिक कार्रवाई के दौरान फरार हो गया और उसकी तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ और खुलासे होने की संभावना है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
