जगदलपुर, 12 मार्च (हि.स.)। श्रीवेदमाता गायत्री शिक्षा महाविद्यालय, कंगोली में आज गुरूवार काे शिक्षा मनोविज्ञान विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बीएड. के छात्र-छात्राओं को शिक्षा के मनोवैज्ञानिक पहलुओं से अवगत कराना और उनके व्यक्तित्व निर्माण में सहायता करना था।

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित विद्या भारती के छत्तीसगढ़ प्रांत प्रचारक एवं संगठन मंत्री डॉ. देवनारायण साहू ने शिक्षा और मनोविज्ञान के अंतर्संबंधों पर गहन चर्चा की । अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि एक कुशल शिक्षक बनने के लिए केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि मन पर नियंत्रण, अंतःकरण की क्रियाओं को समझना और गुरु संस्कार से ज्ञान संस्कार की ओर अग्रसर होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक का कर्तव्य केवल सूचनाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व का निर्माण करना है। शिक्षक और शिक्षार्थी के बीच का संबंध विश्वास, आदर और मार्गदर्शन पर आधारित होना चाहिए, तभी जाकर शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकता है।
संस्था के अध्यक्ष राज बहादुर सिंह राणा ने कहा कि विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने उपस्थित शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों के अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानें और उसे निखारने का निरंतर प्रयास करें ।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य कामना वर्मा, विद्यालय की प्राचार्य भारती देवांगन, उप प्राचार्य अनिल श्रीवास सहित बड़ी संख्या में शिक्षकगण उपस्थित थे। कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक राजीव निगम, मिताली बिश्वास, संदीप अमादिया, ज्योति सिंह, हेम पटेल, रिशु उपाध्याय और अंजली त्रिपाठी का विशेष योगदान रहा। संगोष्ठी में महाविद्यालय के बी.एड. के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और शिक्षा मनोविज्ञान के व्यावहारिक पक्षों को समझा। कार्यक्रम का संचालन देवेंद्र दास ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे
