बाराबंकी 10 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से गुजरने वाली घाघरा नदी पर स्थित ऐतिहासिक संजय सेतु की मरम्मत के दौरान क्षेत्रवासियों को न केवल यातायात की सुविधा मिलेगी, बल्कि उन्हें दशकों पुरानी यादों से जुड़ने का भी अवसर मिलेगा। सेतु मरम्मत कार्य के दौरान यातायात को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन की ओर से पीपे का अस्थायी पुल तैयार किया जाएगा, जो कभी इस क्षेत्र में नदी पार करने का प्रमुख साधन हुआ करता था।

यह पीपे का पुल केवल वैकल्पिक व्यवस्था नहीं, बल्कि अतीत की स्मृतियों को वर्तमान से जोड़ने वाली एक जीवंत कड़ी भी होगा। वर्ष 1982–83 के दौर में जब लोग पीपे के पुल से घाघरा पार किया करते थे, वही अनुभव अब आधुनिक सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी के साथ दोबारा देखने को मिलेगा।

मरम्मत अवधि में संजय सेतु पर यातायात बाधित न हो, इसके लिए बनाए जाने वाले इस अस्थायी पुल से पैदल यात्रियों, दुपहिया वाहनों, मोटर कारों, स्कूल वैन तथा एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं का आवागमन निर्बाध रूप से जारी रहेगा। इससे स्थानीय नागरिकों, मरीजों, विद्यार्थियों और व्यापारिक गतिविधियों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, पीपे का पुल नियंत्रित क्षमता और पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के तहत संचालित किया जाएगा। आवश्यकतानुसार निगरानी, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा इंतज़ाम सुनिश्चित किए जाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा या जोखिम से बचा जा सके।
स्थानीय लोगों के लिए यह पुल सुविधा और भावनाओं का संगम साबित होगा। जहाँ एक ओर दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति होगी, वहीं दूसरी ओर घाघरा की लहरों पर तैरता यह पुल बीते दौर की यादों को फिर से जीवंत कर देगा।
संजय सेतु की मरम्मत के बीच प्रस्तावित यह पीपे का पुल इतिहास और वर्तमान को जोड़ने वाला एक अनोखा प्रतीक बनकर सामने आएगा।
रामनगर तहसीलदार विपुल सिंह ने बताया कि फाल्गुनी मेला के बाद पीपे के पुल बनाए जाने के लिए जिलाधिकारी बाराबंकी ने कहा है। स्थानीय तहसील प्रशासन से जो भी सहयोग के लिए ऊपर से आदेश व निर्देश आएगा उसका पालन किया जाएगा।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज कुमार चतुवेर्दी
