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आसनसोल 08 अप्रैल (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच चुनाव आयोग द्वारा लागू की गई एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने शुरुआत से ही इस पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि यह कदम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर उठाया गया है, जिससे राज्य के मतदाताओं को परेशान किया जा सके। पश्चिम बर्दवान जिले के सालानपुर प्रखंड में भी इस मुद्दे का असर साफ देखने को मिल रहा है।
सालानपुर में कई लोगों ने शिकायत की है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। जेमारी इलाके की एक महिला ने बताया कि उनका, उनके बेटे और बेटी का नाम सूची से गायब हो गया है, जबकि वे लंबे समय से इसी क्षेत्र की निवासी हैं और पिछले चुनाव में उन्होंने मतदान भी किया था।
महिला का कहना है कि उन्होंने आवश्यक एन्यूमरेशन फॉर्म भी भरा था, इसके बावजूद उनका नाम काट दिया गया, जिससे वे बेहद परेशान हैं। महिला ने यह भी बताया कि इस स्थिति में तृणमूल कार्यकर्ता उनकी मदद के लिए आगे आए हैं।
उनके अनुसार, पार्टी की ओर से बस की व्यवस्था की गई है, जिसके माध्यम से प्रभावित लोगों को जिलाधिकारी कार्यालय ले जाया जा रहा है, जहां वे आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता हर संभव सहयोग कर रहे हैं ताकि उनका नाम दोबारा मतदाता सूची में जुड़ सके।
इस पूरे मामले पर सालानपुर प्रखंड के तृणमूल उपाध्यक्ष भोला सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को एहसास है कि वह पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में नहीं आ सकती, इसलिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर मतदाताओं के नाम कटवाए जा रहे हैं।
उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां भी लाखों लोगों के नाम सूची से हटाए गए और उनका राशन बंद कर दिया गया।
भोला सिंह ने आशंका जताई कि भाजपा पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह की रणनीति अपनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य के लोगों के मताधिकार की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं और किसी को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
हिन्दुस्थान समाचार
