कानपुर, 26 मार्च (हि.स.)। “भगवान खोजे नहीं, पुकारे जाते हैं और सच्ची भक्ति ही उन्हें प्राप्त करने का मार्ग है,” श्री हनुमान कथा के पांचवें दिन पूज्य संत विजय कौशल जी महाराज ने लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए प्रभु राम के मानवीय स्वरूप और भ्रातृ प्रेम को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण के मूर्छित होने पर राम ने एक साधारण मनुष्य की तरह व्याकुल होकर विलाप किया और स्वयं को उनके बिना असहाय बताया। यह बातें गुरुवार को पूज्य संत विजय कौशल महाराज ने कहीं।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित श्री हनुमान कथा के पांचवें दिन महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने लक्ष्मण को सहोदर कहकर संबोधित किया, जिससे उनके गहरे भ्रातृ प्रेम का भाव प्रकट होता है।
हनुमान जी की भक्ति का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि लक्ष्मण जी की मूर्छा दूर करने के लिए हनुमान जी लंका से राजवैद्य सुषेन को लेकर आए। उनके कहने पर संजीवनी बूटी लाने हेतु पूरा पर्वत उठाकर ले आए और मार्ग में भरत जी से उनका मिलन भी हुआ, जो अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग है।
महाराज ने कहा कि माता सीता के आशीर्वाद से हनुमान जी अजर-अमर हुए। रावण की अमर सेना का सामना करते हुए उन्होंने अपनी अद्भुत शक्ति का परिचय दिया और अकेले ही उसका विनाश किया।
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान का कोई निश्चित रूप या नाम नहीं होता, उन्हें भक्त अपनी भावना से स्वरूप देता है। भगवान को खोजने की नहीं, बल्कि सच्चे भाव से पुकारने की आवश्यकता होती है। इसे स्पष्ट करने के लिए उन्होंने नरसी भक्त की कथा का भी वर्णन किया।
कथा के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, सांसद देवेंद्र सिंह भोले, विधायक महेश त्रिवेदी, विधायक अमिताभ बाजपेयी, महापौर प्रमिला पांडेय, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष देवेश कोरी, महिला आयोग सदस्य अनीता गुप्ता, कुलपति प्रो. विनय पाठक सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
