रामगढ़, 08 अप्रैल (हि.स.)। जिले में एक बेहद अनोखा मामला सामने आया है। जिस मकान को कोर्ट के आदेश से खाली कराने के लिए पूरा सरकारी महकमा पहुंचा था, वह मकान सरकारी जमीन पर बनी हुई निकली। सुबह से लेकर शाम तक लगातार सरकारी अमीन ने नापी की

रामगढ़ अंचल क्षेत्र के रांची रोड मरार में पुराने एनएच 33 के किनारे दुर्गा मंडप के पास बेहद कीमती जमीन पर कब्जा करने की कोशिश हो रही थी। मरार निवासी प्रमिला देवी और हीरालाल साहू ने विमल रजक के खिलाफ एविक्सन सूट चलाया। कोर्ट ने उनके मामले में सुनवाई करते हुए विमल रजक के खिलाफ फैसला सुनाया। साथ ही जमीन के दस्तावेज के आधार पर खाता नंबर 17, प्लॉट नंबर 986 में बने हुए खपड़े के मकान को खाली करने का आदेश जारी कर दिया।
वहीं मामले में रामगढ़ अंचल अधिकारी रमेश रविदास की सूझबूझ से साजिशकर्ता की साजिश सफल नहीं हो सकी। उन्होंने जब खाता नंबर 17 के प्लॉट नंबर 986 में बिक्री हुए पट्टे के आधार पर जांच और जमीन की नापी शुरू कराई तो बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जमीन की नापी में यह भी स्पष्ट हो गया कि जिस जमीन पर विमल रजक रह रहा है वह जमीन पीडब्ल्यूडी की है।
प्रमिला देवी के परिवार वालों ने बताया कि वर्ष 2003 में पहली बार विमल रजक के खिलाफ मुकदमा शुरू किया गया था। काफी लंबे अर्से तक मुकदमा चलने के बाद उन लोगों ने विमल रजक को अपना किराएदार साबित किया। इसके बाद किराए के मकान को खाली कराने के लिए 06 साल तक एविक्शन सूट का मुकदमा चला।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश
