देहरादून, 20 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद प्रदेश की सियासत में क्षेत्रीय संतुलन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। विस्तार के बावजूद गढ़वाल मंडल का दबदबा कायम रहा, जहां कैबिनेट के 12 सदस्यों में से आठ मंत्री गढ़वाल से हैं, जबकि कुमाऊं को चार मंत्रियों से संतोष करना पड़ा है। सामाजिक समीकरणों की दृष्टि से भी मंत्रिमंडल में ठाकुर और ब्राह्मण वर्ग का प्रभाव अधिक दिखाई देता है।

लोकसभा क्षेत्रों के आधार पर देखें तो हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र को पहली बार दो मंत्री मिले हैं, जिनमें मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा शामिल हैं। नैनीताल-ऊधम सिंह नगर क्षेत्र से सौरभ बहुगुणा के साथ राम सिंह केड़ा को प्रतिनिधित्व मिला है। पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक चार मंत्रियों के रूप में सामने आया है। सतपाल महाराज, धन सिंह रावत और सुबोध उनियाल पहले से कैबिनेट में शामिल थे, जबकि विस्तार में भरत सिंह चौधरी को शामिल किया गया। टिहरी क्षेत्र से गणेश जोशी के साथ खजान दास को जगह मिली है। जिला स्तर पर देखें तो देहरादून, पौड़ी और हरिद्वार से दो-दो मंत्री शामिल हैं, जबकि बागेश्वर, उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे चार जिले प्रतिनिधित्व से वंचित रह गए हैं।
सामाजिक समीकरणों की दृष्टि से भी कैबिनेट में ठाकुर और ब्राह्मण वर्ग का प्रभाव अधिक दिखाई देता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, धन सिंह रावत और सतपाल महाराज के साथ नए शामिल भरत सिंह चौधरी और राम सिंह केड़ा ठाकुर वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, सौरभ बहुगुणा और मदन कौशिक ब्राह्मण वर्ग से हैं। प्रदीप बत्रा के रूप में पंजाबी वर्ग को भी प्रतिनिधित्व मिला है, जबकि खजान दास को शामिल कर दलित प्रतिनिधित्व को संतुलित करने का प्रयास किया गया है। महिला प्रतिनिधित्व की दृष्टि से कैबिनेट में केवल रेखा आर्य ही शामिल हैं। चंदन राम दास के निधन के बाद कैबिनेट में दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व सीमित रह गया था, जिसे खजान दास को मंत्री बनाकर संतुलित करने का प्रयास किया गया है।
कैबिनेट विस्तार को चुनावी संतुलन साधने की कवायद माना जा रहा है, हालांकि हरिद्वार और कुमाऊं क्षेत्र में राजनीतिक चुनौती अभी भी बनी हुई है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 19 सीटें मिली थीं, जो बाद में उपचुनावों के बाद बढ़कर 21 हो गईं। इनमें अधिकांश सीटें हरिद्वार और कुमाऊं क्षेत्र से थीं। हरिद्वार में भाजपा ने मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा को कैबिनेट में शामिल कर संतुलन साधने का प्रयास किया है, लेकिन क्षेत्र में दलित और मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव महत्वपूर्ण बना हुआ है, जो चुनावी समीकरणों को प्रभावित करता रहा है।
कुमाऊं मंडल में भी कांग्रेस की मजबूत उपस्थिति बनी हुई है। वर्तमान विधानसभा में कांग्रेस के अधिकांश विधायक इसी क्षेत्र से हैं, जबकि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कुमाऊं को अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिला है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय संतुलन की चुनौती आगामी चुनावों में अहम बनी रह सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विस्तार चुनावी संतुलन साधने का प्रयास जरूर है, लेकिन हरिद्वार और कुमाऊं क्षेत्र में राजनीतिक चुनौती अभी भी बनी हुई है, जहां पिछले चुनावों में विपक्ष को उल्लेखनीय समर्थन मिला था।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय
