सिरसा, 24 फ़रवरी (हि.स.)। चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू) सिरसा के कुलपति प्रो. विजय कुमार ने कहा है कि बहु-विषयी अनुसंधान के सशक्त विकास के लिए फाइव सी-रचनात्मकता, चरित्र, दक्षता, जागरूकता और सहयोग अत्यंत आवश्यक तत्व हैं। ये पांचों आयाम शोधार्थियों को नवीन दृष्टिकोण, नैतिक मूल्यों, व्यावहारिक कौशल तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ समग्र एवं गुणवत्तापूर्ण शोध की दिशा प्रदान करते हैं। विशेष रूप से सहयोग की भावना विभिन्न विषयों के समन्वय को सुदृढ़ बनाकर ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करती है, जिससे बहु-विषयी अनुसंधान अधिक प्रभावी, नवोन्मेषी और परिणामोन्मुख बनता है।

कुलपति प्रो. विजय कुमार मंगलवार को जेसीडी विद्यापीठ सिरसा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। कुलपति ने कहा कि बहुविषयक शोध भविष्य की आवश्यकता है, शिक्षा में नवाचार से ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा संभव है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शोध-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देती है तथा युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियां ज्ञान के आदान-प्रदान का सशक्त मंच होती हैं और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता संस्थान की वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करती है। उनका मत था कि शोध समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में केंद्रित होना चाहिए। डिजिटल लर्निंग भविष्य की शिक्षा प्रणाली का आधार बनेगी तथा नवाचार ही आत्मनिर्भर भारत की दिशा निर्धारित करेगा।

सीडीएलयू के प्रो. पंकज शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य केवल शोध-पत्र प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि विचारों का आदान-प्रदान और सहयोगात्मक शोध को बढ़ावा देना है। उन्होंने बहुविषयक शोध, डिजिटल शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित लर्निंग एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियों से शोधार्थियों को नई दिशा, प्रेरणा और नेटवर्किंग के अवसर प्राप्त होते हैं। साथ ही उन्होंने शोध को समाज की आवश्यकताओं से जोडऩे पर बल दिया और शोधार्थियों को नवीन तकनीकों को अपनाने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया।
विद्यापीठ के महानिदेशक डा. जयप्रकाश ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए देश-विदेश से 300 शोध-सार प्राप्त हुए। प्रतिभागियों में प्रोफेशनल्स, कॉर्पोरेट प्रतिनिधि, विदेशी प्रतिनिधि, शिक्षाविद्, शोधार्थी, जेसीडी विद्यापीठ के फैकल्टी सदस्य तथा स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं शामिल रहे। जिला स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक प्रतिभागियों ने इस संगोष्ठी में सहभागिता की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया से प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य वाणिज्य, मानविकी, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्रों में उभरते रुझानों और नवाचारों की गहन पड़ताल करना रहा।
हिन्दुस्थान समाचार / Dinesh Chand Sharma
