
जमशेदपुर,01 अप्रैल (हि.स.)। सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के भुइंयाडीह स्थित लाल भट्ट इलाके में बहने वाली सुवर्णरेखा नदी के किनारे बुधवार सुबह एक चौंकाने वाला दृश्य सामने आया। नदी तट पर सैकड़ों मछलियां मृत अवस्था में पाई गईं। सुबह टहलने और दैनिक कार्यों के लिए पहुंचे लोगों ने जैसे ही बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियों को देखा,वे हैरान रह गए और तुरंत इसकी सूचना आसपास के लोगों को दी।

स्थानीय निवासी के सुखदेव भुईयां,संजय प्रसाद,दुग्रेश सिंह के अनुसार, मृत मछलियों की संख्या काफी अधिक है और अनुमान लगाया जा रहा है कि यह मात्रा चार क्विंटल से भी ज्यादा हो सकती है। नदी किनारे बिखरी मछलियों का आकार भी अलग-अलग है—कुछ छोटी मछलियां लगभग 250 ग्राम की हैं, जबकि कई बड़ी मछलियों का वजन डेढ़ किलोग्राम तक बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि नदी के अंदर और भी अधिक मछलियां मरी हुई हो सकती हैं,जो सतह पर नहीं आ पाई हैं।
इस घटना ने एक बार फिर से सुवर्णरेखा नदी में बढ़ते प्रदूषण के मुद्दे को उजागर कर दिया है। जानकारी के अनुसार, रांची से निकलने वाली यह नदी पहले से ही औद्योगिक और शहरी कचरे के कारण प्रभावित रही है। आगे चलकर चांडिल डैम से छोड़ा गया पानी इसमें मिलता है और फिर खरकई नदी के साथ संगम होता है। इस दौरान आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला रासायनिक और अपशिष्ट जल भी नदी में मिल जाता है, जिससे जल की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि मछलियों की इतनी बड़ी संख्या में मौत के पीछे पानी में घुलित ऑक्सीजन की कमी एक कारण हो सकती है, जो आमतौर पर अत्यधिक प्रदूषण और जल प्रवाह में कमी के कारण होता है। हालांकि, यदि पानी में किसी प्रकार के जहरीले रसायनों का मिश्रण हुआ है, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ऐसी स्थिति में इन मछलियों का सेवन करना मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है,जिससे फूड पॉइजनिंग या अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।—————
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक
