— वास्तविक सफलता केवल विजय में नहीं, बल्कि सहभागिता, निष्ठा में निहित: प्रो. रंजन कुमार

वाराणसी, 22 फरवरी (हि.स.)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव स्पंदन 2026 के दूसरे दिन रविवार को परिसर स्थित संगीत एवं मंचकला संकाय के पं. ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में शास्त्रीय वाद्य प्रतियोगिता में छात्रों ने प्रतिभा बिखेरी। इन प्रतियोगिताओं ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की ताल और सुर की परंपराओं की समृद्धि को सजीव रूप में प्रतिभागियों ने प्रस्तुत किया। ‘शास्त्रीय वाद्य ताल’ विषय पर आधारित तालवाद्य खंड में लय, गति, सटीकता और प्रस्तुति की ऊर्जा ने श्रोताओं को जहां मंत्रमुग्ध किया, वहीं गैर-तालवाद्य खंड में हारमोनियम, बांसुरी, गिटार और वीणा जैसे वाद्यों की मधुर प्रस्तुतियों ने भी मंच को नई उंचाई दी।

इसके पहले कार्यक्रम का शुभारंभ छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो.सिंह ने कहा कि वास्तविक सफलता केवल विजय में नहीं, बल्कि सहभागिता, निष्ठा और समर्पण में निहित होती है। इसके बाद दोनों श्रेणियों में प्रतिभागियों ने पूरी दक्षता, स्वर की स्पष्टता, लय पर नियंत्रण तथा कलात्मक अभिव्यक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। आयोजन का संयोजन डॉ. प्रेम किशोर मिश्र एवं उनकी आयोजन टीम ने किया।
—छात्रों ने परिसर को जीवंत कैनवास में बदला
स्पंदन 2026 के द्वितीय दिवस पर दृश्य कला संकाय के कला वीथिका में सृजनात्मकता का रंगारंग उत्सव देखने को मिला, जहाँ पोस्टर निर्माण एवं ऑन-द-स्पॉट फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं ने वातावरण को रंग, विचार और गंभीर अभिव्यक्ति से आलोकित कर दिया। विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और दृष्टिकोण से स्थल को एक जीवंत कैनवास में परिवर्तित कर दिया। पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में 17 प्रतिभागियों ने ‘ग्रीन बीएचयू’ तथा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ विषयों पर अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। इसके उपरांत ‘कैंपस ब्यूटी’ विषय पर ऑन-द-स्पॉट फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसका संयोजन दृश्य कला संकाय की प्रोफेसर जस्मिंदर कौर ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी
