नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। आर्थिक सर्वेक्षण में मानव पूंजी और आर्थिक उत्पादकता को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार के महत्व पर जोर दिया गया है। इसमें स्वस्थ आबादी को मजबूत भविष्य को सुनिश्चित करने का एक प्रमुख स्तंभ बताया गया है।

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रस्तुत किया। सर्वे में बताया गया है कि 1990 से भारत ने अपनी मातृ मृत्यु दर, पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर, नवजात मृत्यु दर में काफी कमी दर्ज की है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, मोटापे की समस्या से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता है। 2019-21 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की रिपोर्ट के अनुसार, 24 प्रतिशत भारतीय महिलाएं और 23 प्रतिशत भारतीय पुरुष अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अधिक वजन का प्रचलन 2015-16 में 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 2019-21 में 3.4 प्रतिशत हो गया है।
सर्वेक्षण अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए आहार और नीतिगत हस्तक्षेपों पर जोर दिया गया है। सर्वेक्षण से पता चलता है कि आहार संबंधी सुधारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता के रूप में लिया जाना चाहिए। भारत यूपीएफ (यूपी) बिक्री के लिए सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। 2009 से 2023 तक इसमें 150 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
सर्वे प्रभावी प्रबंधन के लिए स्थानीय रूप से उत्पादित खाद्य पदार्थों, पारंपरिक खाद्य पदार्थों को लोकप्रिय बनाने और आयुष (जैसे, योग को बढ़ावा देना) जैसी पारंपरिक प्रथाओं का उपयोग करने की आवश्यकता को दर्शाता है।
सर्वेक्षण में बच्चों में डिजिटल लत की बढ़ती समस्या पर भी प्रकाश डाला गया है। डिजिटल लत ध्यान भटकाने, नींद की कमी और एकाग्रता में कमी के कारण शैक्षणिक प्रदर्शन और कार्यस्थल उत्पादकता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। यह सामाजिक साख को भी कम करती है।
इसके अलावा सर्वे में सोशल मीडिया को लेकर चिंता जाहिर की गई है। इसमें कहा गया है कि इसकी लत चिंता, अवसाद, कम आत्मसम्मान और साइबरबुलिंग के तनाव से गहराई से जुड़ी हुई है। भारतीय युवाओं को प्रभावित करने वाली अन्य समस्याओं में अत्यधिक स्क्रॉलिंग, सामाजिक तुलना और गेमिंग विकार शामिल हैं। ये समस्याएं नींद में खलल, आक्रामकता, सामाजिक अलगाव और अवसाद का कारण बनती हैं, जिनमें किशोर विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं।
सर्वे में टेली-मानस और बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान में सर्विस फॉर हेल्दी यूज ऑफ टेक्नोलॉजी क्लिनिक के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करने को रेखांकित किया गया है। साथ ही सर्वेक्षण ‘स्वास्थ्य हॉटस्पॉट’ की पहचान करने के लिए एआई और प्रौद्योगिकी संचालित सर्वेक्षणों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा
