शिमला, 13 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में नर्सरी से पहली कक्षा तक बच्चों के दाखिले को लेकर चल रही उलझन को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने आयु सीमा से जुड़े नियमों को स्पष्ट कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यदि कोई बच्चा शैक्षणिक सत्र के दौरान 30 सितंबर तक संबंधित कक्षा के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु पूरी कर लेता है, तो उसे उस कक्षा में प्रवेश देने से स्कूल मना नहीं कर सकते।

शिक्षा सचिव की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि हाल के दिनों में फील्ड अधिकारियों, स्कूलों और अभिभावकों की ओर से दाखिले और अगली कक्षा में प्रोमोशन को लेकर कई सवाल सामने आ रहे थे। इन्हीं सवालों को देखते हुए सरकार ने नियमों की समीक्षा कर यह स्पष्टीकरण जारी किया है, ताकि पूरे राज्य में दाखिला प्रक्रिया को लेकर कोई भ्रम न रहे।
सरकार के अनुसार नर्सरी, बालवाटिका-1, बालवाटिका-2, बालवाटिका-3 और पहली कक्षा में प्रवेश के लिए यदि बच्चा उसी शैक्षणिक वर्ष में 30 सितंबर तक तय न्यूनतम उम्र पूरी कर लेता है, तो वह उस कक्षा में दाखिले के लिए पात्र माना जाएगा। ऐसे बच्चों को शैक्षणिक सत्र या दाखिला प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रवेश दिया जा सकता है।
सरकार ने इसे उदाहरण के साथ भी समझाया है। जैसे अगर किसी बच्चे की जन्मतिथि 15 अप्रैल 2023 है और वह शैक्षणिक सत्र 2026-27 में बालवाटिका-1 में दाखिला लेना चाहता है, तो उसे प्रवेश मिल सकता है क्योंकि वह 15 अप्रैल 2026 को तीन साल का हो जाएगा और यह तारीख 30 सितंबर 2026 से पहले आती है।
इसी तरह यदि कोई बच्चा पहले से किसी प्री-प्राइमरी कक्षा में पढ़ रहा है और वह 30 सितंबर 2026 तक अगली कक्षा के लिए तय आयु पूरी कर लेता है, तो उसे अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी बच्चे की जन्मतिथि 25 अगस्त 2020 है और वह सत्र 2026-27 में बालवाटिका-2 या बालवाटिका-3 में पढ़ रहा है, तो उसे पहली कक्षा में दाखिला मिल सकेगा क्योंकि वह 30 सितंबर 2026 से पहले छह साल की उम्र पूरी कर लेगा।
सरकार ने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों में अभिभावकों की सहमति जरूरी होगी। यदि बच्चा आयु मानदंड पूरा करता है और माता-पिता सहमत हैं, तो स्कूल उसे प्रवेश देने से मना नहीं कर सकते।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह नियम हिमाचल प्रदेश के सभी स्कूलों पर लागू होंगे। इसमें सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूल भी शामिल हैं।
सरकार ने यह भी व्यवस्था की है कि अगर कोई स्कूल इन नियमों का पालन नहीं करता और किसी पात्र बच्चे को प्रवेश देने से इनकार करता है, तो अभिभावक संबंधित जिले के उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा के पास शिकायत कर सकते हैं। ऐसे मामलों में उपनिदेशक का फैसला अंतिम होगा और सभी स्कूलों को उसे मानना होगा।
स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा निदेशक को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि कोई स्कूल इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ हिमाचल प्रदेश आरटीई नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
