शिमला, 19 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा उठा और इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नियमितिकरण से जुड़े एक सवाल का जवाब न मिलने पर मामला और गरमा गया।

भाजपा विधायक दीपराम ने कहा कि उन्होंने एक साल पहले इस विषय पर सवाल पूछा था, लेकिन अब तक उन्हें इसका जवाब नहीं मिला है। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि आखिर कितने आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया है।
इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही इस संबंध में पूरी जानकारी संबंधित विधायक को उपलब्ध करवा देगी।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव के समय पहली कैबिनेट में एक लाख नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। उनके मुताबिक करीब 15 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है।
जयराम ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां कांग्रेस नेताओं के नाम पर पंजीकृत हैं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है। उन्होंने कहा कि साक्षात्कार से पहले उम्मीदवारों से पैसे लिए जा रहे हैं, जबकि चयन होगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
इन आरोपों पर मुख्यमंत्री ने सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष के पास इस तरह की कोई ठोस जानकारी है तो उसे सामने रखें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर आरोप गलत साबित होते हैं तो उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बनाया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
