स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान शताब्दी पर कांगड़ी

में होगा अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन

गुरुकुल धीरणवास का 53वां वार्षिक उत्सव संपन्न
हिसार, 07 फरवरी (हि.स.)। गुरुकुल धीरणवास की
स्थापना के 53 वर्ष एवं आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में
वार्षिक उत्सव का आयोजन गुरुकुल धीरणवास मे किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सार्वदेशिक
आर्य प्रतिनिधि सभा, नई दिल्ली के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में स्वामी आर्यवेश ने
शनिवार काे कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती जी की 200वीं जयंती वर्ष के अवसर पर केंद्र सरकार को
दिल्ली में उनके नाम से एक अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय स्थापित करना चाहिए, जिसमें स्वतंत्रता
आंदोलन में आर्य समाज के योगदान को प्रदर्शित किया जाए क्योंकि आजादी के आंदोलन मे
आर्य समाज का सर्वाधिक योगदान रहा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उद्योगपति एवं समाजसेवी
बनवारी लाल पूनिया ने बहुद्देशीय सभागार गुरुकुल को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि
गुरुकुलों मे विद्वान एवं राष्ट्रवादी नवयुवक तैयार किए जाते है इसलिए गुरुकुलों का
सहयोग जरुरी है।
सार्वदेशिक आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय महासचिव
स्वामी आदित्यवेश ने कहा कि आज समाज को सबसे अधिक आवश्यकता युवाओं के निर्माण की है।
गुरुकुल शिक्षा परम्परा परम्परा युवाओं को संस्कारित करने का एक अभियान है। किसान नेता
शमसेर आर्य ने कहा कि आज समाज को अंधविश्वास, पाखण्ड और अपराधी मानसिकता से मुक्त करना
होगा। आर्य समाज वसुधैव कुटुंबकम की भावना से कार्य करते हुए समरस और सशक्त समाज के
निर्माण में लगा है।
मुख्य अतिथि ब्लॉक समिति के अध्यक्ष अजय गावड़,
मार्केट कमेटी के चेयरमेन रविंद्र रोकी, नलवा के विधायक रणधीर पनिहार के भाई सुभाष
पनिहार, पार्षद प्रतिनिधि संदीप धीरणवास भी कार्यक्रम मे पहुचे। सुभाष पनिहार ने कहा
कि आज समाज मे नैतिक मूल्यों को ओर ज्यादा बढ़ाना होगा। अजय गावड़ ने कहा कि सामाजिक
कार्य समाज के एक साथ प्रयास से आगे बढ़ते हैँ. सम्पूर्ण समाज को मिलकर देश की उन्नति
का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम मे विशिष्ट अतिथि आर्य समाज नागोरी गेट हिसार के प्रधान
देवेंद्र आर्य ने कहा कि देश में सामाजिक सौहार्द की स्थापना वेद आधारित विचारधारा
से ही संभव है। कन्या गुरुकुल पंचगाव की आचार्य ज़्यादेवी ने कहा कि आज बेटियां पढ़ रही
हैँ तो उसका श्रेय ऋषि दयानन्द को जाता है।
रविंद्र रोकी ने नशे को समाज पर कलंक बताते हुए
आर्य समाज के अभियान को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। संदीप धीरणवास ने कहा कि ऋषि
दयानन्द की विचारधारा आज पहले से अधिक प्रासंगिक है। कार्यकारी प्रधान सूबेसिंह आर्य
ने सभी का आभार प्रकट किया। सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कन्या गुरुकुल पंचगांव, डोभी, घिराय, गुरुकुल मताना डिग्गी, गुरुकुल आर्य
नगर, गुरुकुल धीरणवास, ब्रह्म महाविधालय के बच्चों ने गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम
में कैप्टन सूबे सिंह, महेन्द्र आर्य, दलबीर आर्य, सुरेन्द्र आर्य, भूपसिंह आर्य, अजमेर
सिंह आदि उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर
