विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025 विषय पर एक दिवसीय आनंदशाला आयोजित

कुलुगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने की उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता

हिसार, 29 जनवरी (हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
में प्रदेश के विश्वविद्यालय के कुलगुरुओं तथा प्रमुख शिक्षाविदों ने प्रस्तावित ‘विकसित
भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025 (वीबीएसए-2025)’ विषय पर हुए एक दिवसीय आनंदशाला
कार्यक्रम में गहन मंथन एवं विचार विमर्श किया। विश्वविद्यालय के चौधरी रणबीर सिंह
सभागार में गुरुवार काे हुए इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का आयोजन गुजविप्रौवि तथा भारतीय शिक्षण मंडल,
हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान किया गया।
अध्यक्षता उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता गुजविप्रौवि
के कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने की। उद्घाटन समारोह में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय
रोहतक के कुलगुरु राजबीर सिंह तथा महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल के
कुलगुरु प्रो. राजेन्द्र अनायथ, भारतीय शिक्षण मंडल हरियाणा के प्रांतीय अध्यक्ष प्रो.
जितेन्द्र भारद्वाज तथा गुजविप्रौवि के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. योगेश चाबा भी मंच
पर उपस्थित रहे।
कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि वीबीएसए-2025 देश की उच्च शिक्षा
पर गंभीर और सकारात्मक मंच प्रदान करेगा। पुरानी व्यवस्थाओं के सहारे नई चुनौतियों
का सामना करना संभव नहीं है। इस विधेयक से देश की सभी उच्च शिक्षण संस्थाएं एक ही मुख्य
संस्था से सम्बद्ध होंगी, जिससे ज्ञान, शोध व सतत विकास के क्षेत्र में एक नई यात्रा
का शुभारंभ होगा। उन्होंने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि
हम फिर से विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
प्रो. राजेन्द्र अनायथ ने वीबीएसए-2025 में अंतर्निहित प्रस्तावित सुधारों
की वैचारिक आधार भूमि एवं नीतिगत औचित्यों पर विचार करते हुए विधेयक के सकारात्मक पक्ष
के साथ-साथ चुनौतियों का जिक्र भी किया जबकि कुलगुरु राजबीर सिंह ने वर्तमान प्रणाली
एवं वीबीएसए संरचना का तुलानत्मक विश्लेषण एवं संरचनात्मक विवेचना प्रस्तुत की। प्रो.
जितेन्द्र भारद्वाज ने इस सत्र का सार प्रस्तुत किया।
इस सत्र में कुलगुरु प्रो. राजेन्द्र अनायत तथा कुलगुरु प्रो. राजबीर सिंह
ने विकसित भारत की परिकल्पना के संदर्भ में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विकसित
भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025 के अंतर्निहित प्रस्तावित सुधारों की वैचारिक आधारभूमि,
नीतिगत औचित्य तथा वर्तमान प्रणाली एवं विधेयक संरचना का तुलनात्मक विश्लेषण एवं संरचनात्मक
विवेचन विषय पर विस्तार से विचार प्रस्तुत किए गए। उद्घाटन सत्र विधेयक के मूल दर्शन
एवं उसके माध्यम से प्रस्तावित उच्च शिक्षा सुधारों की समग्र पृष्ठभूमि को रेखांकित
करने वाला रहा। सत्र का सार भारतीय शिक्षण मंडल के प्रांत अध्यक्ष प्रो. जितेंद्र भारद्वाज
ने प्रस्तुत किया।
आनंदशाला का द्वितीय सत्र कुलगुरुओं के पैनल डिस्कशन के रूप में आयोजित किया
गया, जिसकी अध्यक्षता श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, पलवल के कुलगुरु प्रो. दिनेश
कुमार ने की। इस सत्र में
कुलगुरुओं व विशेषज्ञों प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. विजय कुमार, प्रो. बीआर कम्बोज, प्रो.
रामपाल सैनी, प्रो. देवेन्द्र सिंह, प्रो. अमित आर्य, प्रो. दीप्ति धर्माणी, प्रो.
विक्रमजीत सिंह, प्रो. विवेक सैनी तथा प्रो. योगेश चाबा द्वारा उच्च शिक्षा में प्रस्तावित
संस्थागत स्वायत्तता, फेडरल शासन व्यवस्था, गुणवत्ता आश्वासन एवं प्रत्यायन सुधार,
विधेयक में निहित परिवर्तनों के प्रति संस्थानों की प्रतिक्रियाएं, कार्यान्वयन एवं
संक्रमण से जुड़े विभिन्न हितधारकों के दृष्टिकोण, प्रमुख चुनौतियां तथा संक्रमणकालीन
चिंताओं पर विस्तारपूर्वक विमर्श किया गया।
यह एक दिवसीय आनन्दशाला कार्यक्रम शिक्षा नीति, शैक्षणिक प्रशासन
एवं उच्च शिक्षा सुधारों से जुड़े विद्वानों, प्रशासकों एवं नीति निर्माताओं के लिए
विचार-विमर्श का एक प्रभावी मंच प्रदान करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा तथा विकसित
भारत के शैक्षिक संकल्प को ठोस दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। तकनीकी सत्रों के दौरान वक्ताओं
एवं प्रतिभागियों के बीच संरचित एवं समन्वित संवाद के माध्यम से विधेयक के विभिन्न
प्रावधानों पर समालोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर
