जयपुर, 11 मार्च (हि.स.)। जिले में संभावित हीटवेव को देखते हुए चिकित्सा विभाग ने बचाव और रोकथाम के लिए प्रभावी प्रबंधन के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निदेशालय से प्राप्त निर्देशों के तहत सभी खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को चिकित्सा संस्थानों में पर्याप्त संसाधन और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (जयपुर द्वितीय) डॉ. मनीष मित्तल ने बताया कि हीटवेव के दौरान आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके तहत इमरजेंसी कक्ष का सुचारु प्रबंधन, तापमान नियंत्रण के लिए एसी, कूलर, पंखे और पर्दों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिला स्तर के अस्पतालों में 10 बेड, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 3 से 6 बेड और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कम से कम 1 बेड लू-तापघात से पीड़ित मरीजों के लिए आरक्षित रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही सभी चिकित्सा संस्थानों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के लिए आइसोलेशन कॉर्नर स्थापित किए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने लू-तापघात के उपचार में उपयोगी दवाइयों और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, हीट स्ट्रोक से संबंधित मामलों का रजिस्ट्रेशन करने तथा तापमान अधिक होने की स्थिति में मनरेगा कार्य योजना के अनुरूप बचाव उपाय अपनाने के निर्देश भी दिए हैं।
उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (स्वास्थ्य) द्वितीय डॉ. सुरेन्द्र कुमार गोयल ने बताया कि चिकित्सा संस्थानों में ओपीडी पंजीकरण और दवा वितरण काउंटर पर छाया की व्यवस्था, स्वच्छ और ठंडे पेयजल की उपलब्धता, प्रतीक्षालय में शेड तथा अस्पताल परिसरों में साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा सतत पर्यवेक्षण और मॉनिटरिंग, संबंधित कर्मचारियों को थर्मामीटर, आइस पैक और ड्रिप सेट के उपयोग का प्रशिक्षण देने तथा आमजन में जागरूकता के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। साथ ही सभी संस्थानों में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और गर्मी से राहत के प्रयासों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश
