नई दिल्ली, 15 अप्रैल (हि.स)। पश्चिम एशिया संकट के बीच खुदरा महंगाई के बाद थोक महंगाई दर भी लगातार पांचवें महीने बढ़कर 3.88 फीसदी पर पहुंच गई। फरवरी माह में यह 2.13 फीसदी और मार्च, 2025 में 2.25 फीसदी रही थी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित थोक महंगाई दर ईंधन, बिजली एवं विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से मार्च महीने में बढ़कर 3.88 फीसदी पर पहुंची है। मंत्रालय ने कहा कि कच्चे तेल एवं नेचुरल गैस, अन्य विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुएं, ‘बेसिक मेटल’ विनिर्माण और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से थोक महंगाई दर में इजाफा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक ईंधन एवं बिजली श्रेणी में महंगाई मार्च में बढ़कर 1.05 फीसदी हो गई, जबकि फरवरी में इसमें 3.78 फीसदी की गिरावट (डिफ्लेशन) दर्ज की गई थी।
डब्ल्यूपीआई के जारी आंकड़ों के मुताबिक कच्चे तेल की मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 51.57 फीसदी हो गई, जबकि फरवरी महीने इसमें 1.29 फीसदी की गिरावट आई थी। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर भी फरवरी के 2.92 फीसदी से बढ़कर मार्च में 3.39 फीसदी पर पहुंच गई। खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर हालांकि, मार्च में घटकर 1.90 फीसदी रह गई है, जो फरवरी में 2.19 फीसदी थी। इसके अलावा सब्जियों की महंगाई दर घटकर 1.45 फीसदी हो गई, जबकि फरवरी में यह 4.73 फीसदी थी।
इससे पहले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर मार्च में बढ़कर 3.4 फीसदी हो गई थी, जो पिछले फरवरी महीने में 3.21 फीसदी थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इस महीने की शुरुआत में चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अपनी पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति पेश करते हुए ब्याज दरों को यथावत रखा था। आरबीआई नीतिगत दरों के निर्धारण के लिए मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को आधार मानता है।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर
