गोलाघाट (असम), 06 फरवरी (हि.स.)। असम में अवैध प्रव्रजन और पहचान को लेकर चल रही बहस के बीच मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस पार्टी को साफ तौर पर यह बताना चाहिए कि वह असमिया लोगों के साथ है या ‘मियां’ (बांग्लादेशी घुसपैठिए) समुदाय के साथ। देरगांव में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर अब किसी भी तरह की राजनीतिक अस्पष्टता स्वीकार्य नहीं है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा ‘मियां’ शब्द का प्रयोग बांग्लादेश से आए प्रवासियों के लिए किया गया है। उन्होंने दावा किया कि पहले ऐसे लोग मुख्य रूप से बरपेटा और धुबड़ी जैसे जिलों तक सीमित थे, लेकिन अब उनका फैलाव ऊपरी असम के दुलियाजान और मार्घेरिटा जैसे इलाकों तक हो गया है।
भूमि और जनसांख्यिकीय बदलावों पर चिंता जताते हुए डॉ. सरमा ने आरोप लगाया कि असम में लगभग 10 लाख एकड़ भूमि पर कब्जा हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में स्वदेशी असमिया लोग कहां जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि बटद्रवा जैसे संवेदनशील और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी लगातार अतिक्रमण हो रहा है, जो असम की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना के लिए गंभीर चुनौती है।
आगामी विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस से सीधे तौर पर उसके रुख को लेकर सवाल किए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता गौरव गोगोई को हर्ष मंदर और अमन वडूद सलाह दे रहे हैं और दावा किया कि वे एक ऐसी पुस्तक के संपादन में शामिल रहे हैं, जिसमें यह कहा गया है कि असमिया लोग बाद में असम आए जबकि मियां समुदाय पहले से मौजूद था। डॉ. सरमा ने यह भी आरोप लगाया कि उक्त पुस्तक अब्दुल मुहीब मजूमदार द्वारा लिखी गई और इसका संपादन अमन वडूद ने किया, जिन्हें उन्होंने कांग्रेस के सोशल मीडिया सेल का अध्यक्ष बताया।
अपने रुख को और मजबूत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं, बल्कि असमिया लोगों के अस्तित्व, भूमि और पहचान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार असम के हित में इन सवालों को खुलकर और मजबूती से उठाती रहेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश
