गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में ओलंपिक तैयारियों और खेल नीतियों पर हुई चर्चा

हरिद्वार, 15 अप्रैल (हि.स.)। फिजिकल एजूकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के महासचिव एवं लवली प्रोफेशनल विश्वविद्यालय, फगवाड़ा के प्रोफेसर इन प्रैक्टिस डॉ. पीयूष जैन ने कहा कि शारीरिक शिक्षा के बिना खेलों का अस्तित्व मात्र एक कल्पना है। उन्हाेंने कहा कि लंबे समय तक शारीरिक शिक्षा को खेल का हिस्सा न मानने का भ्रम अब समाप्त हो रहा है।
प्राे पीयूष जैन गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग की ओर से दयानंद स्टेडियम परिसर स्थित मेजर ध्यानचंद सभागार में आयोजित विशेष व्याख्यान में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने भारत में आगामी दशक में संभावित ओलंपिक आयोजन की तैयारियों, खेल नीति, प्रशिक्षण पैटर्न और खिलाडि़यों की प्रिपरेशन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक शारीरिक शिक्षा को खेल का हिस्सा न मानने का भ्रम अब समाप्त हो रहा है। डॉ. जैन ने आगे कहा कि वर्तमान में खेलों के क्षेत्र में देश तेजी से प्रगति कर रहा है और युवाओं को नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने वैज्ञानिक प्रशिक्षण को उत्कृष्ट खिलाड़ी बनने की अनिवार्य शर्त बताया।
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत विभाग प्रभारी डॉ. अजय मलिक के अतिथि परिचय एवं उनके योगदान के उल्लेख से हुई। संचालन डॉ. शिवकुमार चौहान ने किया, जिन्होंने खेलों में शारीरिक शिक्षा की वैज्ञानिक भूमिका पर जोर दिया। इस अवसर पर आईक्यूएसी प्रभारी डॉ. कपिल मिश्रा, डॉ. अनुज कुमार, डॉ. प्रणवीर सिंह, मीडिया सेल अध्यक्ष डॉ. अजीत तोमर सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। एम.पी.एड., बी.पी.एड. एवं बी.पी.ई.एस. के छात्रों ने करियर और अवसरों से जुड़े प्रश्नों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला
