सहरसा, 17 अप्रैल (हि.स.)।भारत मिशन योजना के अंतर्गत पांडुलिपि सर्वेक्षण कराने कए उद्देश्य से कहरा एवं महिषी प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया गया।इस क्रम में जिलाधिकारी,उप विकास आयुक्त, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, गोपनीय प्रशाखा पदाधिकारी जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी सहित सर्वेयर सदस्यों द्वारा स्व हीराकांत झा, जवाहर ठाकुर महिषी, संजय कुमार एवं मनोज कुमार के आवास पर जाकर पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया गया।अधिकारियों ने पांडुलिपियों के संरक्षण,संवर्धन एवं उनके ऐतिहासिक महत्व पर विस्तृत चर्चा की। साथ ही पांडुलिपियों के डिजिटलाइजेशन के महत्व पर बल दिया गया, ताकि इन्हें दीर्घकाल तक सुरक्षित रखा जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुलभ बनाया जा सके।

ज्ञात हो कि जब कागज का आविष्कार नही हुआ था उससे पूर्व लोक ताम्रपत्र,भोजपत्र,पेड़ो की छाल,ताड़पत्र, जैसे पत्ते पर लेखन कार्य कर पांडुलिपि तैयार करते रहे।इसके साथ साथ पत्थरों पर विभिन्न प्रकार कें आकृति शिलालेख भी तैयार किए जाते रहे।मिट्टी के घरो में रहने वाले दिवाल पर भितिचित्र बनाते रहें। डिजिटल युग में पौराणिक रीति-रिवाज,ऐतिहासिक व पुरातात्विक व अध्यात्मिक ज्ञान की धरोहर का डिजिटलाजेशन होने पर आने वाले पीढ़ियों को जानकारी रहेगा। पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी सहित सर्वेयर सदस्यों द्वारा स्व हीराकांत झा, जवाहर ठाकुर महिषी तथा संजय कुमार एवं मनोज कुमार कए आवास पर जाकर पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया गया।
अधिकारियों ने पांडुलिपियों के संरक्षण,संवर्धन एवं उनके ऐतिहासिक महत्व पर विस्तृत चर्चा की। साथ ही पांडुलिपियों के डिजिटलाइजेशन के महत्व पर बल दिया गया, ताकि इन्हें दीर्घकाल तक सुरक्षित रखा जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुलभ बनाया जा सके।ज्ञात हो कि जब कागज का आविष्कार नही हुआ था उससे पूर्व लोक ताम्रपत्र, भोजपत्र,पेड़ो की छाल,ताड़पत्र, जैसे पत्ते पर लेखन कार्य कर पांडुलिपि तैयार करते रहे।इसके साथ साथ पत्थरों पर विभिन्न प्रकार कें आकृति शिलालेख भी तैयार किए जाते रहे।मिट्टी के घरो में रहने वाले दिवाल पर भितिचित्र बनाते रहें। डिजिटल युग में पौराणिक रीति-रिवाज,ऐतिहासिक व पुरातात्विक व अध्यात्मिक ज्ञान की धरोहर का डिजिटलाजेशन होने पर आने वाले पीढ़ियों को जानकारी रहेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार
