खूंटी, 19 अप्रैल (हि.स.)।

जैसे-जैसे गर्मी की तपिश बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे खूंटी जिले में जल संकट भी गहराता जा रहा है। जिले के कई इलाकों में नदी, नाले और तालाब लगभग सूख चुके हैं, जिसके कारण न केवल इंसानों बल्कि पशु-पक्षियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जहां लोग किसी तरह चापानल और अन्य स्रोतों से अपनी प्यास बुझा रहे हैं, वहीं बेजुबान जानवरों के लिए पानी की समस्या और गंभीर होती जा रही है।
सरकार की महत्वाकांक्षी “हर घर नल जल” योजना भी जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पहले शुरू की गई इस योजना का लाभ आज तक कई गांवों तक नहीं पहुंच पाया है। बताया जाता है कि पिछले करीब 15 वर्षों में भी यह योजना पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या जस की तस बनी हुई है।
अड़की प्रखंड के तिनतिला पंचायत का उदाहरण इस समस्या की वास्तविक तस्वीर सामने लाता है। पंचायत के आडीडीह, डोल्डा सहित लगभग सभी गांवों में जलमीनार का निर्माण तो करा दिया गया है, लेकिन उन्हें चालू करने के लिए जरूरी मोटर अब तक नहीं लगाई गई है। इसके कारण ये जलमीनार केवल एक ढांचा बनकर रह गए हैं और ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिना मोटर के टंकी में पानी चढ़ाना संभव नहीं है। ऐसे में लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई जलमीनार बेकार पड़ी हुई है। गांव के लोग आज भी पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। कई बार उन्हें दूर-दराज के चापानल या कुओं से पानी लाना पड़ता है, जिससे खासकर महिलाओं और बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव के दौरान क्षेत्र के विधायक और सांसद ने पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने का वादा किया था। लोगों को उम्मीद थी कि जलमीनार के माध्यम से गांवों में घर-घर तक साफ पानी पहुंचाया जाएगा, लेकिन अब तक यह वादा पूरा नहीं हो सका है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जलमीनार में जल्द मोटर लगा दी जाए और इसे चालू कर दिया जाए, तो गांव के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे न केवल पेयजल की समस्या दूर होगी, बल्कि लोगों को रोजाना पानी के लिए भटकना भी नहीं पड़ेगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द जलमीनारों में मोटर लगाई जाए और योजना को पूरी तरह चालू किया जाए। ताकि गांव के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सके और बढ़ती गर्मी के बीच उन्हें राहत मिल सके।
खूंटी शहरी क्षेत्र के लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए दस साल पहले 59 करोड़ रुपये की लागत से खूंटी शहरी जलापूर्ति योजना शुरू की गई थी, लेकिन अब तक योजना पूरी नहीं हुई है। खूंटी नगर पंचायत के वार्ड पार्षद अनूप कुमार साहू कहते हैं कि राज्य सरकार की लापरवाही के कारण योजना अधूरी है। इस सरकार को गरीबों से कोई लेना देना नहीं है। तोरपा पूर्वी पंचायत के उप मुखिया राजू साहू ने कहा कि जब नदियां ही पूरी तरह सूख गई हैं तो जलापूर्ति व्यवस्था चरमराएगी ही।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा
