जगदलपुर, 14 अप्रैल (हि.स.)। बस्तर जिले में इस वर्ष धान उठाव को लेकर प्रशासन ने सुनियोजित रणनीति अपनाई है, 79 खरीद केंद्रों में जमा धान को समय पर और सुरक्षित तरीके से उठाने के लिए मार्कफेड और खाद्य विभाग ने संयुक्त रूप से अभियान तेज कर दिया है। इस बार विशेष बात यह है कि जीरो वेस्टेज यानी बिना किसी नुकसान के धान उठाव सुनिश्चित करने का लक्ष्य तय किया गया है।

उम्मीद है कि इस साल खरीद केंद्रों से पूरे धान का उठाव 25 अप्रैल से पहले पूरा कर लिया जाएगा। इस साल भी धान की खरीद जीरो वेस्टेज के आधार पर किए जाने की कोशिश की जा रही है। विदित हाे कि खाद्य नियंत्रक घनश्याम सिंह राठौर ने कुछ दिनों पहले धान का उठाव जल्द से जल्द पूरा करने के लिए नई योजना बनाई गई थी। जिसके अनुसार अब धान का उठाव खरीद केंद्रों से करवाया जा रहा है।
शुरूआती दौर में मिलर्स के द्वारा धान का उठाव समय पर होते नहीं देख प्रशासन ने इसकी जिम्मेदारी परिवहन कर्ता को दी । साेमवार तक जिले के खरीद केंद्रों में केवल 7 लाख 56 हजार 360 क्विंटल धान पड़ा हुआ था। इतनी बड़ी मात्रा को समय पर उठाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती हाेगी, वर्तमान में प्रतिदिन करीब 400 से 500 टन धान का उठाव किया जा रहा है, जिससे स्टॉक तेजी से कम हो रहा है। अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि कहीं भी धान खराब न हो और पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी हो।
धान उठाव के साथ-साथ संग्रहण केंद्रों में रखे अतिरिक्त धान के प्रबंधन के लिए भी योजना बनाई गई है। मार्कफेड द्वारा इस साल करीब 1 लाख 60 हजार क्विंटल धान को नीलाम किया जाएगा। यह धान लगभग 1950 रुपये क्विंटल की दर से मिलर्स या फर्मों को दिया जाएगा। इस अभियान को गति देने के लिए इस साल बस्तर जिले में 36 और प्रदेश के अन्य 11 जिलों के करीब 50 से अधिक राइस मिलर्स को धान उठाव की जिम्मेदारी दी गई है। ये मिलर्स न केवल संभागीय मुख्यालय के आस-पास बल्कि अंदरूनी इलाकों के बस्तर बल्कि 11 जिलों के मिलर्स भी उठाव कार्य में जुटे हुए हैं। मिलर्स की सक्रिय भागीदारी से उठाव की रफ्तार में काफी सुधार आया है और लक्ष्य समय पर पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है।
डीएमओ राजेंद्र कुमार ध्रुव ने बताया कि शासन की इस सक्रियता से साफ है कि इस बार धान खरीद और उठाव को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश नहीं छोड़ी जा रही है। अधिकारियों की टीम लगातार माैके में जाकर स्थिति का जायजा ले रही है और मिलर्स के साथ समन्वय बनाकर काम किया जा रहा है। प्रशासन ने पहले से ही रणनीति तैयार कर ली थी, ताकि खरीद के बाद धान लंबे समय तक केंद्रों में न पड़े रहे। उनका कहना है कि जीरो वेस्टेज मॉडल के तहत हर स्तर पर सावधानी बरती जा रही है, जिससे धान की गुणवत्ता बनी रहे और नुकसान की संभावना शून्य हो।
खाद्य नियंत्रक घनश्याम सिंह राठौर ने बताया कि इस बार बस्तर जिले में 40667 किसानों ने सरकार के द्वारा तय किए गए समर्थन मूल्य पर 2817420 क्विंटल धान बेचा था। 79 खरीद केंद्रों के माध्यम से खरीदा गया धान को सुरक्षित रूप से उठाव कराने की जिम्मेदारी दी गई जिसके अनुसार धान का उठाव किया जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे
